Thursday, 5 March 2020

एक लोटा दूध | Hindi

एक लोटा दूध

-सौ. भक्ति सौरभ खानवलकर
-कोलंबिया, साउथ कैरोलिना, यू. एस. .



            बहुत समय पहले की बात है, काफी दिनों से बारिश ना होने की वजह से एक गांव में सूखा पड़ गया था। हर तरफ हाहाकार मच गया। पानी की कमी के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। गांव में केवल एक ही आचार्य थे जो पढ़े-लिखे थे। लोगों ने उनसे इस समस्या के समाधान के लिए कोई उपाय खोजने को कहा। आचार्य ने सूखे को रोकने और गांव में बारिश हो जाए इसके लिए बहुत सारे प्रयास किए। लेकिन कोई भी प्रयास सफल नहीं हुआ। गांव में सूखे की समस्या पहले की तरह ही बनी हुई थी। गांव के लोगों के सामने सभी रास्ते बंद हो चुके थे। 
              बहुत दुखी हो कर और हाथ जोड़कर सभी गांव वाले भगवान से प्रार्थना करने लगे। तभी वहां भगवान द्वारा भेजा गया एक दूत पहुंचा और उसने गांव के लोगों से उनकी परीक्षा लेते हुए कहा, "अगर आज रात सभी लोग गांव के कुएं में बिना झाके एक लोटा दूध डालेंगे तो कल से ही आपके गांव में सूखे की समस्या कम हो जाएगी और बारिश हो जाएगी।" गांव के लोग खुश हुए और सभी लोग एक लोटा दूध डालने के लिए तैयार हो गए। रात को जब गांव के सभी लोग कुएं में दूध डालने लगे तब गांव के एक कंजूस व्यक्ति ने सोचा कि गांव के सभी लोग उस कुएं में तो दूध डालेंगे ही, अगर अकेला वह‌ कुएं में एक लोटा पानी डाल देगा तो रात के अंधेरे में किसी को पता नहीं चलेगा। यह सोचकर उसने कुएं में एक लोटा पानी डाल दिया।
          अगले दिन लोगों ने बारिश का इंतजार किया लेकिन अभी भी गांव में सूखा पड़ा हुआ था और बारिश का कोई नामोनिशान तक नहीं था। सब कुछ पहले जैसा ही था। लोग सोचने लगे की दूत की कही हुई बात सत्य साबित क्यों नहीं हुई? इस बात का पता लगाने के लिए सभी उस कुएं की तरफ़ देखने के लिए गए। उन्होंने कुएं में झांककर देखा तो सभी हैरान रह गए। पूरा कुआं केवल पानी से भरा हुआ था। उसमें एक भी बूंद दूध की नहीं थी। सभी ने एक दूसरे की ओर देखा और तभी सब समझ गए कि सूखे की समस्या अभी तक समाप्त क्यों नहीं हुई। दोस्तों, ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि जो बात उस कंजूस आदमी के दिमाग में आई थी कि सभी लोग तो दूध डालेंगे अगर वह एक लोटा पानी डाल देगा तो रात के अंधेरे में किसी को पता नहीं चलेगा, यही बात पूरे गांव वालों के दिमाग में भी आई थी और सभी ने दूध की जगह एक लोटा पानी कुएं में डाल दिया।

शिक्षा- दोस्तों! जो कुछ इस कहानी में हुआ आजकल यह हम सब के जीवन में होना एक सामान्य बात है। हम कहते हैं कि हमारे अकेले के बदलने से क्या समाज बदल जाएगा? पर याद रखिए अपने काम की ज़िम्मेदारी दूसरों पर डाले बिना काम को ईमानदारी और मेहनत से कर हम अकेले ही समाज में बदलाव लाने के लिए सक्षम है। याद रखिए, बूंद-बूंद से ही सागर बनता है। हम बदलेंगे, तभी हमारा देश बदलेगा।




Wednesday, 4 March 2020

ईमानदारी का ईनाम | Hindi

ईमानदारी का ईनाम


-सौ. भक्ति सौरभ खानवलकर
-कोलंबिया, साउथ कैरोलिना, यू. एस. ए.


        एक समय की बात है एक छोटे से कस्बे में जो एक नदी के किनारे बसा था, वहां मोनू नाम का एक आदमी रहता था। जो पेशे से पेंटर था। लोगों के घरों की पुताई करके इतना कमा लेता था कि बस पेट भरने के लिए दो वक्त की रोटी मिल जाती थी। मोनू बहुत ही मेहनती और ईमानदार व्यक्ति था। एक दिन उस कसबे का जमींदार मोनू के पास आया और उसे कहा कि वह उसकी नाव को सुंदर रंगों से रंग दे। जमींदार उसे उसका मेहनताना जो मोनू कहेगा वह दे देगा। नाव देखकर मोनू ने जमींदार से नाव को रंगने का शुल्क निश्चित किया। मोनू ने तुरंत अपना काम शुरू किया। लेकिन उसने देखा कि नाव में एक बड़ा छेद था। उसने अपनी सूझबूझ और ईमानदारी के चलते सबसे पहले नाव को दुरुस्त किया और फिर उस नाव को रंगा। खूबसूरत रंगी हुई नाव देखकर जमींदार खुश हुआ और उसने मोनू से कहा कल शाम को आकर अपना मेहनताना ले जाना। 
       अगले ही दिन सुबह जमींदार का परिवार उस नाव में सवार होकर नदी की सैर करने के लिए निकल गया। एक महीने की छुट्टी के बाद जमींदार के घर काम करने वाला नौकर उसी दिन लौटा और बाहर नाव ना देखकर जमींदार से नाव के बारे में पूछने लगा। जमींदार ने बताया कि उसका परिवार नाव में सवार होकर नदी में सैर करने के लिए गया है। यह सुनते ही नौकर ने जमींदार को बताया कि उस नाव के नीचे एक छेद था। यह बात सुनते ही जमींदार के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। लेकिन तभी नदी की सैर करके जमींदार का परिवार सकुशल घर लौट आया। यह देख जमींदार बहुत खुश हुआ।
        जब शाम को मोनू अपना मेहनताना लेने जमींदार के पास पहुंचा तो जमींदार ने मोनू को तय रुपए से अधिक रुपए दिए। जब मोनू ने रुपए गिने तो उसने जमींदार से कहा कि उन्होंने उसे गलती से अधिक रुपए दे दिए हैं। यह बात सुन जमींदार ने मोनू से कहा की उसने नाव के नीचे का छेद अपना काम समझकर ईमानदारी से दुरुस्त कर दिया और  ना ही उसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क मांगा। यदि वह ऐसा नहीं करता तो उसका परिवार नदी में बह जाता और वह अपने परिवार को खो देता। मोनू की सच्ची ईमानदारी और मेहनत से खुश होकर अधिक धन भेंट स्वरूप दिए।

शिक्षा- इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है की मेहनत के साथ-साथ मनुष्य को हर काम ईमानदारी से करते रहना चाहिए क्योंकि ईमानदारी का ईनाम मनुष्य को अपने जीवन में अवश्य मिलता है।


Tuesday, 3 March 2020

आलसी बेटा | Hindi

आलसी बेटा


-सौ भक्ति सौरभ खानवलकर
-कोलंबिया, साउथ कैरोलिना, यू. एस. ए.


एक छोटे शहर में एक व्यापारी रहता था। उसका बेटा बहुत आलसी था और हमेशा सोता ही रहता था। व्यापारी की दिनचर्या शिव मंदिर जाने के बाद अपने कारखाने जाकर अपना काम करना था। व्यापारी बहुत मेहनती और कर्मठ था। वह हमेशा अपने बेटे से कहता था कि वह उसके साथ जाकर व्यापार किस तरह किया जाता है यह समझे और जाने क्योंकि भविष्य में उसे ही पूरा व्यापार संभालना है। पर अपने आलस्य के कारण व्यापारी का बेटा उसकी बात नहीं मानता था। एक दिन व्यापारी बहुत बीमार पड़ा। धीरे-धीरे सारा धन उसके इलाज में खर्च होता गया। व्यापारी को अपनी बीमारी के चलते व्यापार में ध्यान नहीं देने के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था। फिर भी व्यापारी का आलसी बेटा किसी भी बात पर ध्यान नहीं दे रहा था और आलस्य में हमेशा सोता रहता था।
एक बार उसकी मां ने कहा कि जाकर अपने कारखाने में देखो कि ठीक तरह से काम हो रहा है या नहीं। उसने अपनी मां की बात यह कह कर टाल दी कि उसे तो इन सब बातों का कोई ज्ञान ही नहीं है। कभी अपने पिता के साथ वह व्यापार सीखने नहीं गया। फिर उसकी मां ने उसे एक उपाय सुझाया कि उसे अपने नाना के पास, जो पास ही के गांव में रहते हैं, जाकर सलाह लेनी चाहिए की उसे व्यापार बचाने के लिए क्या करना चाहिए। अगले ही दिन वह अपने नाना के गांव गया। वहां नाना ने उसे सलाह दी कि वह अपने पिता की तरह दिनचर्या अपनाए और मेहनत करे। नाना ने उससे इस सलाह पर अमल करने का वादा भी करवाया। अगले दिन वह अपने शहर लौटा।
अपने पिता की तरह ही सुबह शिव मंदिर जाकर रोज़ कारखाने जाने लगा। उसे कारखाने में देख जो लोग गलत काम कर रहे थे जिससे व्यापार में नुकसान हो रहा था वह सावधान हो गए और ठीक से काम करने लगे। धीरे-धीरे व्यापार फिर से अच्छा चलने लगा। व्यापार के मुनाफे के पैसों से उसने अपने पिता का पूरा इलाज करवाया जिससे वह जल्दी ठीक हो गए और दोनों पिता-पुत्र मिलकर व्यापार करने लगे। सब पहले की तरह सामान्य होता देख वह अपने नाना को उनकी सलाह के लिए धन्यवाद देने दोबारा उनके गांव पहुंचा। उसके नाना ने कहा कि यह उनकी सलाह से नहीं बल्कि उसके आलस्य त्याग कर मेहनत का रास्ता अपनाने से संभव हो पाया है।

शिक्षा- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। आलस्य को त्याग कर, निष्ठा और मेहनत से अपना काम करें तो ही अपने जीवन में सफल हो पाएंगे।

Sunday, 1 March 2020

होशियार बकरी | Hindi

होशियार बकरी


-सौ. भक्ति सौरभ खानवलकर
-कोलंबिया, साउथ कैरोलिना, यू. एस. ए.

आर्टिकल को और भी रोचक बनाने के लिए आर्टिकल का ऑडियो, मेरी आवाज़ में। इसे सुनने की लिए नीचे दिए गए वीडियो पर क्लिक करें।


           एक गांव में एक किसान के पास भूरी नाम की एक बकरी थी। जिसके तीन छोटे बच्चे थे। जिनका किसान बहुत अच्छी तरह से ख्याल रखता था। किसान का घर गांव में सबसे आखिरी में जंगल के पास था। भुरी ने अपने बच्चों को बताया था कि उन्हें जंगल की ओर कभी नहीं जाना है वहां अन्य जंगली जानवर उन्हें कुछ भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। 
      एक दिन भूरी के एक बच्चे ने किसान के बेटे को किसी से बात करते सुना कि जंगल में बहुत सारा हरा चारा चारों तरफ फैला हुआ है। यह बात सुन भूरी के उस बच्चे में हरी घास खाने का लालच पैदा हुआ और वह हरी घास खाने जंगल की ओर निकल पड़ा। जब भूरी को इस बात का पता चला तो वह अपने बच्चे को ढूंढने के लिए जंगल की ओर निकल पड़ी। बुरी का बच्चा जंगल में थोड़ी दूर तक पहुंचा ही था की अचानक तीन सियार उसके सामने आ गए और वह उस बच्चे को अपना आहार बनाने के बारे में सोच ही रहे थे कि तब तक भूरी भी अपने बच्चे को ढूंढती हुई वहां पहुंच गई। 
       सियारों को अपने इर्द-गिर्द देखकर पहले वह भी थोड़ी घबराई लेकिन अगले ही क्षण अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल करते हुए उसने एक तरकीब सोची और सियारों से कहा कि उसे और उसके बच्चे को यहां शेर छोड़ गया है आज वह शेर का शिकार हैं। यदि सियार उसे और उसके बच्चे को खा जाएंगे तो शेर उन्हें नहीं छोड़ेगा। उन सियारों को भूरी की बात झूठ लगी। तभी बुरी को वहां अचानक एक हाथी नज़र आया और उसने उन सियरों से कहा देखो शेर राजा ने हाथी को हमारी निगरानी के लिए रखा है यदि तुमने हमें हाथ भी लगाया तो हाथी शेर को तुम्हारे बारे में बता देगा कि तुम ने ही हम दोनों का शिकार किया है और फिर शेर राजा तुम्हें दंडित करेंगे। पास ही हाथी खड़ा देख सियारों को भुरी की बात सही लगी और शेर के डर से वे वहां से चले गए। भूरी तेज़ी से अपने बच्चे को लेकर वापस गांव आ गई। उसे अपने बच्चे के साथ सही सलामत देख उसके दूसरे बच्चे और किसान का परिवार बहुत खुश हुआ।

शिक्षा- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि आपके सामने कितनी ही कठिन परिस्थिति ही क्यों ना आ जाए आपको बिना डरे, शांत मन से अपनी बुद्धि का उपयोग करते हुए, सूझबूझ से काम लेते हुए उस परिस्थिति से बाहर निकलने का प्रयत्न करना चाहिए।



अपने सजेशन व कमेंट देने के लिए कमेंट बॉक्स में सजेशन लिखकर पब्लिश आवश्य करें

Friday, 28 February 2020

कोई भी कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता | Hindi


कोई भी कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता


-सौ. भक्ति सौरभ खानवलकर
-कोलंबिया, साउथ कैरोलिना, यू. एस. .

आर्टिकल को और भी रोचक बनाने के लिए आर्टिकल का ऑडियो, मेरी आवाज़ में। इसे सुनने की लिए नीचे दिए गए वीडियो पर क्लिक करें।



        बहुत पहले की बात है। छोटे से शहर में एक छोटा-सा चिंटू नाम का लड़का रहता था। वह पढ़ने-लिखने में बहुत होशियार था। परंतु उसके माता-पिता इतने सक्षम नहीं थे कि वे चिंटू को उच्च शिक्षा दे सकें। चिंटू साधारण स्कूल में पढ़ता था और उसमें कुछ कर दिखाने का एक जज़्बा था। वह खुद अपनी स्कूल फीस भरने के लिए हर रोज़ सुबह दूसरे मोहल्ले में सभी के घर पर जाकर अखबार बेचने का काम किया करता था। एक दिन रोज़ की तरह ही वह सभी के घर अखबार बेचने के लिए गया। उस दिन चिंटू की तबीयत कुछ ठीक नहीं थी। वह जिस घर के सामने था उसका दरवाज़ा बजाकर उसने पीने के लिए एक गिलास पानी मांगा। पर उसे वहां से भगा दिया गया। ऐसे ही वह हर एक घर में जाकर पीने के लिए थोड़ा-सा पानी मांग रहा था।
        किसी ने भी उसकी सहायता नहीं की। सभी ने उसे दुत्कार कर भगा दिया। सबसे आखिर में वह एक छोटे पुराने मकान के दरवाज़े की ओर गया। उसने सोचा शायद यह लोग भी मुझे भगा देंगे फिर भी उसने हिम्मत करके उसका दरवाज़ा खटखटाया। दरवाज़ा एक महिला ने खोला। चिंटू ने उससे पीने के लिए एक गिलास पानी मांगा। महिला को चिंटू बिल्कुल अपने बेटे जैसा लगा। चिंटू की तबीयत खराब देख कर उसने उसे प्यार से बैठाया और उस के लिए एक ग्लास दूध लेकर आई जिसे पीकर चिंटू को तबीयत में थोड़ा सुधार लगा। जब चिंटू की तबीयत थोड़ी ठीक हुई तभी उसने चिंटू को उसके घर जाने दिया। समय बीतता गया।
         वह महिला जिसने चिंटू की मदद की थी अब बूढ़ी हो गई थी और काफी बीमार रहती थी। उसने बहुत से डॉक्टरों से अपना इलाज करवाया पर उसकी तबीयत में कुछ खास सुधार नहीं होता था। फिर वह शहर के सबसे बड़े डॉक्टर के पास अपना इलाज कराने गई। उस डॉक्टर के इलाज से वह धीरे-धीरे पूरी तरह ठीक हो गई। अस्पताल का बिल बहुत ज्यादा आया होगा, इस बात से चिंतित वह बिल भरने के लिए गई तो उस बिल पर लिखा था - "एक ग्लास दूध का कर्जा आज मैंने चुका दिया। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।" कुछ समझे दोस्तों! शहर का सबसे बड़ा डॉक्टर कौन था? बिल्कुल सही पहचाना आपने। वह चिंटू था जिसकी इस महिला ने बरसों पहले मदद की थी।

शिक्षा- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी प्रकार का अच्छा काम कभी व्यर्थ नहीं जाता। उसका फल हमारे भविष्य में हमें ज़रूर मिलता है। इसीलिए हमेशा जरूरतमंदों की मदद करें और अच्छा काम करते रहें।



अपने सजेशन व कमेंट देने के लिए कमेंट बॉक्स में सजेशन लिखकर पब्लिश आवश्य करें


Tuesday, 25 February 2020

Contact

Learning for life is a blog which has articles with various  genre such as 'Motivational & Inspirational' articles, short 'Moral Stories for Kids', 'Recipes for some Yummy Dishes' especially along with their audios which helps to increase awareness & morale in life, add taste to it and helps you achieve success on multiple platforms. It helps to enhance various skills within you. 

It also has links for my YouTube videos which you may like to watch, Share and Subscribe.

Please feel free to share your valuable views and suggestions

If you are looking for a good content writer for your business, please let me know through Email.

Bhakti Khanwalkar
khanwalkar.bhakti@gmail.com


Monday, 24 February 2020

आज का कर्म ही आपका भविष्य तय करेगा | Hindi

आज का कर्म ही आपका भविष्य तय करेगा


-सौ भक्ति सौरभ खानवलकर
-कोलंबिया, साउथ कैरोलिना, यू. एस. ए.


आर्टिकल को और भी रोचक बनाने के लिए आर्टिकल का ऑडियो, मेरी आवाज़ में। इसे सुनने की लिए नीचे दिए गए वीडियो पर क्लिक करें।


This title means 'Your future depends on the work that you do in your present'. This is a short moral story for kids in Hindi. By this story they will learn to do hard work which will give positive and effective  results in their future.

       एक बार एक गांव में बहुत ही भयंकर अकाल पड़ा था। उस गांव के किसान हर रोज इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए पूजा पाठ और हवन किया करते थे। दिनभर की पूजा पाठ के बाद शाम को एक पेड़ के नीचे सभी किसान इकट्ठा होकर इस अकाल से कैसे मुक्ति मिले या इसको दूर करने का क्या तरीका अपनाया जाए पर चर्चा करते थे। अचानक ही एक किसान को याद आया कि मंगू नामक एक किसान कई दिनों से ना ही पूजा पाठ और हवन में आ रहा है और ना ही शाम की इस चर्चा में। सब यह सोच रहे थे कि शायद हो सकता है वह शहर चला गया हो कुछ पैसे कमाने के लिए या फिर वह कहीं बीमार तो नहीं है। फिर भी सब ने यह सोचा कि अगले दिन उसके घर जाकर उसके बारे में पूछते हैं।
जब सभी किसान अगले दिन उसके घर पहुंचे तो मंगू के बेटे ने बताया कि उसके पापा तो खेत पर काम करने गए हैं। यह सुनकर सभी को बड़ा आश्चर्य हुआ। सभी आपस में बात करने लगे कि इस अकाल में खेत में जाकर मंगू क्या काम कर रहा है। सभी ने सोचा उसके खेत पर जाकर हम उसी से पूछ लेते हैं। जब सब मंगू के खेत पर पहुंचे तो उन्होंने देखा मंगू अपने खेत के पास की एक ज़मीन पर गड्ढा खोद रहा है। सभी ने मंगू से पूछा कि यह तुम क्या कर रहे हो? हम बारिश के लिए रोज हवन पूजन कर रहे हैं और तुम यहां गड्ढा खोद रहे हो। मंगू ने कहा अभी बारिश नहीं हो रही है तो क्या, जब भी बारिश होगी मेरे इसी गड्ढे में पानी जमा होगा जिससे मैं खेती करूंगा। सभी को मंगू की यह बात कुछ अजीब सी लगी और सब ने यह सोचा कि अकाल के कारण खेती नहीं होने से मंगू की मानसिक अवस्था बिगड़ गई है। सब वहां से वापस चले गए।
उस रात अचानक जो़रों से बादल गरजने लगे, बिजलियां चमकने लगीं और कुछ समय के लिए ही ज़ोरदार बरसात हुई। बरसात इतने कम समय के लिए थी कि वह पानी खेत की ज़मीन को उपजाऊ बनाने के लिए पर्याप्त नहीं था। अगली सुबह सब अपने खेत पर यह सोचकर पहुंचे की बरसात से खेत की ज़मीन थोड़ी उपजाऊ हो गई होगी जिससे कि थोड़ी बहुत खेती की शुरुआत की जा सके लेकिन सब ने वहां पहुंच कर देखा सभी खेत वैसे के वैसे ही सूखे थे लेकिन मंगू की खेत की जमीन उपजाऊ थी जिस पर वह खेती कर रहा था। उसने जो गड्ढा खोदा था वह तालाब की तरह पानी से लबालब भरा हुआ था जिसका उपयोग वह अपने खेत को जोतने के लिए कर रहा था। सभी गांव वालों ने मंगू की इस होशियारी के लिए उसे शाबाशी दी।

शिक्षा- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जो भी काम हम आज यानी कि हमारे वर्तमान में करेंगे वही हमारा भविष्य निश्चित करेगा। कहते हैं ना जो बोओगे वही काटोगे। इसीलिए वर्तमान में अच्छे काम करते रहो तभी आपका भविष्य उज्ज्वल बनेगा।



अपने सजेशन व कमेंट देने के लिए कमेंट बॉक्स में सजेशन लिखकर पब्लिश आवश्य करें


Sunday, 23 February 2020

YouTube Videos

To view my YouTube Videos please click on the links given below.



Incredible Bharat


Kuch Toh Log Kahenge, Logo Ka Kaam Hai Kehna


Social Media: Negative Effect of Excessive Use
https://youtu.be/SWaUrbdislA


Friday, 21 February 2020

Sabudana Vada | Tasty, Quick and Easy | English

Sabudana vada 

Cooking is a fun and art. So, enjoy!😀

Sabudana vada is easy, quick and yummy dish whih is mostly prepared during fasting days.

Easy, quick and yummy Sabudana vada recipe is here!



Ingredients for Sabudana vada (for 3-4 person) -
  • 1 bowl Sabudana (soaked over night)
  • 3 medium sized boiled potatoes
  • 3-4 spoon roasted peanut powder
  • Salt
  • Red chilli powder
  • 1.5 jeera (cumin seeds)
  • 1 spoon lemon juice
  • 1 inch Ginger grated or 1.5 tbsp Ginger paste.
  • 2 fine chopped green chillies
  • Fine chopped green coriander leaves
  • Peanut oil (for deep fry or shallow fry)


Process to make Sabudana vada -

Step 1 - Take boiled potatoes in a bowl, peel them and mash them properly. 

Step 2 - Add over night soaked Sabudana, 3-4 spoon roasted peanut powder, 1.5 jeera (cumin seeds), 1 spoon lemon juice, 1 inch Ginger grated or 1.5 tbsp Ginger paste, 2 fine chopped green chillies, fine chopped green coriander leaves, Salt as per taste, Red chilli powder as per taste and mix well.

Step 3 - If you want vada to deep fry pour oil in pan and heat. For shallow frying, heat the pan. 

Step 4 - Wet your hands and make medium sized balls of this mixture. Gently press them and make spherical shape.

Step 5 - Put each vada one-by-one into hot oil for deep fry or keep on hot pan and add oil for shallow fry. Cook till golden brown from both sides in both the cases.

Step 6 - Take out Sabudana vada after it is properly cooked.

Yummy….. 😋Sabudana Vada is ready to serve. 🍲 It can be served with curd or green Faryali chatni (I will share this recipe very soon). Enjoy this delicious and yummy dish!😃

To see this recipe in Hindi please click here👇


If you like this recipe or have any suggestions, please comment.
Share this recipe blog link with your friends too.
Comment and let me know the next recipe you want to learn.
Happy to share this recipe with you. See you in the next recipe. Till then.....Be Happy and be Foodie!😊

साबूदाना वड़ा | Tasty, Quick and Easy | Hindi

साबूदाना वड़ा


Cooking is a fun and art. So, enjoy!😀

साबूदाना वड़ा एक बहुत ही स्वादिष्ट, आसान और जल्दी बनने वाली डिश है। व्रत के दिनों में साबूदाना वड़ा बनाना पहली पसंद होती है। 


जल्दी बनने वाला, आसान और स्वादिष्ट साबूदाना वड़ा विधि -

साबूदाना वड़ा बनाने के लिए सामग्री (2-3 लोगों के लिए) -
  • एक कटोरी साबूदाना (रात भर गलाया हुआ)
  • तीन मध्यम आकार के उबले हुए आलू
  • तीन से चार चम्मच भुनें हुए मूंगफली दानों का पाउडर
  • नमक
  • लाल मिर्च पाउडर
  • 1.5 चम्मच जीरा
  • एक चम्मच नीबू का रस
  • 1 इंच अदरक का टुकड़ा कीस के या 1.5 चम्मच अदरक का पेस्ट
  • दो बारीक कटी हुई हरी मिर्च
  • बारीक कटा हुआ हरा धनिया
  • मूंगफली का तेल (डीप फ्राई या शैलो फ्राई के लिए)


साबूदाना वड़ा बनाने की विधि -

Step 1 - एक बर्तन में उबले हुए आलू के छिलके निकालकर अच्छे से मैश कर लें। 

Step 2 - इसमें रात भर गलाया हुआ एक कटोरी साबूदाना, तीन से चार चम्मच भुने हुए मूंगफली दानों का पाउडर, 1.5 चम्मच जीरा, एक चम्मच नीबू का रस, 1 इंच अदरक का टुकड़ा कीस के (या 1.5 चम्मच अदरक का पेस्ट), 2 बारीक कटी हुई हरी मिर्च, बारीक कटा हुआ हरा धनिया, लाल मिर्च पाउडर स्वादानुसार, नमक स्वादानुसार डाल कर अच्छे से मिला लें।

Step 3 - यदि आप इन्हें डीप फ्राई करना चाहते हैं तो कढ़ाई में मध्यम आंच पर तेल गर्म करने के लिए रख दें। अथवा आप इसे शैलो फ्राई भी कर सकते हैं। शैलो फ्राई करने के लिए गैस पर पेन गर्म होने के लिए रखते दें।

Step 4 - हाथों को थोड़ा पानी लगाकर गीला करें और इस मिश्रण से मध्यम आकार की बॉल्स बनाएं जिन्हें हल्के से दबाकर गोलाकार दें। 

Step 5 - एक-एक करके साबूदाना वड़ों को गरम तेल में डीप फ्राई करें या पेन में शैलो फ्राई करें। दोनों ही प्रकार में वड़ों को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक पकने दें।




Step 6 - साबूदाना वडे़ अच्छे से सुनहरे होने के बाद एक प्लेट में निकाल लें।

स्वादिष्ट… 😋साबूदाना वडे परोसने के लिए तैयार हैं!🍲 इसे आप दही या फरियाली हरी चटनी (इसकी रेसिपी बहुत जल्द आपसे शेयर करूंगी) के साथ सर्व करें।😃

इस रेसिपी को इंग्लिश में देखने के लिए यहां पर क्लिक करें👇


यदि आपको यह रेसिपी पसंद आई हो और आपके कोई सुझाव हों तो प्लीज कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखें
कमेंट करके मुझे ज़रूर बताएं की आप अगली कौन सी रेसिपी सीखना चाहते हैं
यह रेसिपी आपके साथ शेयर करके बहुत अच्छा लगा तो मिलते हैं अगली ऐसी ही किसी नई स्वादिष्ट रेसिपी के साथतब तक के लिए खुश रहिए और खाते रहीए!😊